कोई बात नहीं जब घर रहता है.. तब तो वो ये लड़ियाँ लाना नहीं भूलता..कितने प्यार से मेरे बालों में सजाता है.. फिर उन्हें निहारता है.. खो सा जाता है वो मेरे बालों में सजी लड़ियों में... सैरंध्री अपने मन में सोचकर पुलकित हो रही है, सामने टीवी पर समाचार चल रहा है, अचानक एंकर खबर पढ़ती है कि आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मेजर शहीद.. ओह.. एक आह.. दूजी आह.. तीसरी आह पर वो बेहोश हो जाती है ।
होश आता है तो सामने एक रथनुमा वाहन उसके गेट पर खड़ा है, जो सफेद बेला की लड़ियों से सुशोभित है...