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आखिरी स्नेह

    पैरों को चूमते हुए दूब धीरे धीरे सहला रही है माली के तलवे । माली को गुदगुदी होती है, भीना सा मासूम अहसास भी । 

  पर वो क्या जाने ? जाड़े में गर्म और गर्मियों में सर्द अहसास देने वाली उस नन्हीं मासूम छुईमुई दूब का सौंदर्य । जो गर्म खुरदुरी मिट्टी में एक कोपल के साथ जमती है और धीरे धीरे मिट्टी की गर्मी सोखकर अपने अंदर समाती हुई पूरे लॉन में फैल जाती है, आने जाने वाले लोग अपने रेशमी या खुरदुरे पावों को नर्म मुलायम अहसास देने के लिए पैसे से खरीदे हुए जूते उतार देते हैं और अंगड़ाई लेते हुए अपने प्रिय का हाथ पकड़े उसके दामन में पसर जाते हैं।

माली को कहते हुए आज उसने सुना है, कि अब वो पहले जैसी नहीं रह गई है, आज उसका आखिरी दिन है, क्योंकि ऋतु परिवर्तित हो चुकी है और उम्रदराज होने से उसकी रेशमी पत्तियाँ झड़ रही हैं, अतः उसे जड़ से उखाड़ कर खत्म किया जाएगा उसकी जगह कोई नई घास ले लेगी । दूब तो बस अपने माली को आखिरी स्नेह दे रही है ।               

**जिज्ञासा सिंह**