गागर में सागर
मेरे इस ब्लॉग में मेरी कहानियों और लेखों का संग्रह है, आशा है अपको रुचिकर लगेंगे-
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दवा की दुइ टिक्की
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मंगरू आज फिर गिरता संभलता दोस्तों के सहारे किसी तरह घर पहुँचा । दुलारी उसे देखते ही उसको और उसके दोस्तों को पानी पी पी कर श्रा...
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तीक्ष्ण दृष्टि
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शांता एक वीडियो दिखाने के लिए घर के सभी सदस्यों को बुलाती है, और कहती है, देखो ये रहा वो वीडियो, जो कल वायरल हुआ है, वीडियो में एक लड़की पुल...
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कोने की दुर्गंध… लघु कथा
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सुबह सुबह सोकर उठते ही राघव पूरे घर में नाक भौं सिकोड़े घूम रहा है, अनजानी सी गंध घर में दिनोदिन बढ़ती जा रही है । राघव रोज़ समझने की कोशिश ...
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पहलू बदलता चाँद
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गाड़ी ड्राइव करते हुए गीतिका को चमकता चाँद अपनी ओर आता दिखा, ओह.. चाँद अब तुम्हें क्या देखूँ ? ..उसके मुख से एक टीस सी निकली और जाते हु...
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बोनसाई
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अरे तुम्हें ये क्या हो गया ? कैसे इतनी चोट लग गई ? मैं तुम्हें कई दिनों से ढूंढ रही थी । तुम्हारा फोन नंबर भी बंद आ रहा था । कहां थे तुम ?...
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कुछ तो गड़बड़ है !
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धड़कता सा क्यूँ है? आज मेरा दिल। क्या परेशानी है? सुबह-सुबह मैं हैरान सी क्यूँ हैं? कुछ तो गड़बड़ है, वीणा स्नानघर में कपड़े धोते हुए पा...
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बेला की लड़ियाँ
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मुझे गजरा बहुत पसंद है, वो जब आता है शाम को.. अक्सर उसके हाथ में बेला की लड़ियाँ होती हैं, वो आता ही कितना है, आर्मी में है न... कोई ब...
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