गागर में सागर
मेरे इस ब्लॉग में मेरी कहानियों और लेखों का संग्रह है, आशा है अपको रुचिकर लगेंगे-
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साँचे
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“मिट्टी का लोंदा उलट-पलट कर एक सार कर लिया है।” “बस चाक पर चढ़ा दूँ और बर्तन तैयार।” “आओ बैठो न..। तुम्हें रूप बदलना सिखाती हूँ। इस लोंदे ...
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ऑफ़िस का मौन.. लघुकथा
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स्वप्निल लगातार बोले जा रहा था… “तुम कहती हो कि मेरे अंदर धैर्य नहीं, बिलकुल भी संयम नहीं ! अरे तुम क्या जानो ? जनोगी-सुनोगी-समझोगी, तभी न !...
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प्रस्थान (लघुकथा)
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मृत्यु ने सोलह श्रृंगार किया । मोती माणिक्य से जड़ा रेशम की डोरी वाला , बहुत सुंदर एक बड़ा सा थैला लिया...
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फ़िक्र.. लघुकथा
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“ फ़िक्र फ़िक्र फ़िक्र ” “ कितनी फ़िक्र करते हैं पापा आप” “ इस फ़िक्र के चक्कर में आप खुद तो घनचक्कर होकर ...
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अवधी कहावतें
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लोक-संस्कृति में अवधी कहावतों का सामाजिक सरोकार” अवधी भाषा का इतिहास बड़ा ही प्राचीनतम और वृहद् है, अवध क्षेत्र के ग्रामीण लोक जीवन मे...
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