गागर में सागर
मेरे इस ब्लॉग में मेरी कहानियों और लेखों का संग्रह है, आशा है अपको रुचिकर लगेंगे-
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एक पल की ख़ुशी … कहानी
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रागिनी अपनी कार ढाबे से निकाल रही थी और सामने से एक औरत अपने दुधमुँहे बच्चे को शॉल में लपेटे आती दिखायी दे रही थी ,घूँघट से चेहरा ढका हुआ थ...
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पछतावा … कहानी
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महीनों बाद माली के आते ही राधिका के तेवर गर्म हो गए,उसने माली के ऊपर चिल्लाना शुरू कर दिया और बगीचे में दौड़ दौड़ कर बिखरे हुए सूखे पत्त...
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नानी माँ की धरोहर ( मातृ दिवस )
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संदूक खोलते ही कई सिर उसमें झांकते हुए, जब टकराने लगे तो बड़ी मामी बोली थोड़ा धीरज धरो सभी, अभी एक एक कर सब सामान निकलेंगे और सबको दि...
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गणतंत्र दिवस की वो प्रभातफेरी जो भुलाए नहीं भूलती
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सर्दी के मौसम में सारे बच्चे सुबह सुबह नहा धोकर तैयार हैं , छोटी बुआ, चाचा, बड़े भैया, दीदी एवं गाँव के अनेकानेक बालवृंद इस ख़ुशी में फ...
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इनको कैसे समझाएँ ? ( कामवाली )
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अरे अजनारा तुम कैसे ? कहाँ से आ रही हो ? तुम तो बाहर चली गईं थीं । अरे हाँ ! तुम तो शायद हैदराबाद गई थीं, कब आईं वहाँ से ? क्या हुआ ?...
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महिला ग्राम प्रधान की घरेलू विसंगतियाँ (महिला सशक्तिकरण )
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कुछ सोचते हुए मैं ग्राम प्रधान के सीढ़ीदार घर पे एक-एक सीढ़ी चढ़ रही थी, और घर के दालान से ,छन-छन के आ रही,कई लोगों के बतियाने की आवाज़ स...
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